आसान है ऑर्गेनिक किचन गार्डनिंग/बागवानी

  आसान है ऑर्गेनिक किचन गार्डनिंग/बागवानी       

     

किचन गार्डन की शुरुआत कैसे करें

शुरुआत हमेशा कम बजट और कम समय में तैयार होने वाले पौधों से करें। इससे आपको एक आइडिया मिलेगा कि खेती कैसे करनी चाहिए। शुरुआती 1-2 साल चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन बाद में कोई दिक्कत नहीं आएगी। कम लागत के लिए अच्छा तरीका एक तो यह है कि आप अपने सभी गमले पुरानी-बेकार चीज़ों से बनाएं। जैसे बाल्टी, डिब्बे, कांच की बोतलें, टूटे मटके और तो और किचन की टूटी क्रॉकरी और बर्तन भी आप उपयोग में ले सकते हैं। ग्रो बैग भी खरीदने की बजाय आप उन पैकेट्स का इस्तेमाल कर सकते हैं जैसे आटे का, दाल-चावल का।

अगर कोई पहली बार बागवानी कर रहा है तो उसे किस तरह की वनस्पतियां लगानी चाहिए?

यदि आप पहली बार कुछ उगा रहे हैं तो गर्मियों में पुदीना से शुरू करें। फिर बैंगन, भिंडी, खीरा, ककड़ी, करेला आदि सब आसानी से उगने वाली चीज़ें हैं। आप यह सब लगा सकते हैं। अगर आप सर्दियों में सब्ज़ियां लगा रहे हैं तो सभी पत्तेदार जैसे पालक, धनिया, मेथी, और फिर टमाटर, शिमला मिर्च भी आसानी से लगा सकते हैं। अगर थोड़े और प्रयास करेंगे तो फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रॉक्ली भी आसानी से लग जायेंगे।

  • बागवानी के लिए मिट्टी कैसे तैयार करें

फसल के बाद गोबर, किचन वेस्ट आदि से निर्मित जैविक उर्वरकों का उपयोग करें। इससे मिट्टी में लगे कीटों को खत्म करने में मदद मिलती है। गार्डनिंग के लिए मिट्टी तैयार करना बहुत ही आसान है। आप सबसे पहले तो किसी नर्सरी से या फिर आपके घर के पास कहीं से मिट्टी ले लीजिए। कोई मिट्टी बुरी नहीं होती, क्योंकि उसे पोषक बनाने के काम हमारा है।अब इस मिट्टी में आप गोबर की खाद/वर्मीकंपोस्ट या फिर घर के गीले कचरे से बनाई हुई खाद मिला लीजिए। फिर इसमें कोकोपीट मिलाइए। अगर कोकोपीट उपलब्ध नहीं है तो आप पेड़ों के सूखे पत्ते भी इकट्ठा करके मिला सकते हैं।

  • अगर हम छत पर पेड़-पौधे लगा रहे हैं तो क्या इससे हमारी छत में लीकेज हो सकता है या फिर किसी भी तरह से यह खराब हो सकती है

 

नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। आप बस ध्यान रखें कि आपकी छत पर बहुत पानी भरा हुआ न रहे। साथ ही, सभी पेड़-पौधे आप गमलों और ग्रो बैग्स में लगाएं। छत पर सीधा मिट्टी न डालें बल्कि आप प्लास्टिक शीट इस्तेमाल कर सकते हैं। छत पर बागवानी करने का कोई नुकसान नहीं है। बस ध्यान रखें कि कहीं सिंचाई के पानी का रिसाव ना हो।

 

  • बागवानी के लिए कम लागत में संसाधनों की पूर्ति कैसे करें?

आप पौधों को लगाने के लिए घर के बेकार बर्तनों, डिब्बों आदि का उपयोग करें, जबकि खाद के लिए किचन वेस्ट जैसे कि सब्जियों के छिलके, दाल-चावल का धुला पानी आदि।

  • सिंचाई के लिए किस विधि का उपयोग करें?

 

आप छत पर लगे पौधों की सिंचाई बाल्टी और मग से कर सकते हैं। जबकि, जमीन पर अपने फसल की सिंचाई ड्रिप इरिगेशन सिस्टम के तहत करें।

  • बागवानी करने के लिए उचित समय क्या है?

पेड़-पौधे लगाने के लिए 12 महीने उपयुक्त समय रहता है। बस ध्यान रहे कि आप मौसम के हिसाब से पेड़-पौधे लगाएं। गर्मी वाली सब्ज़ियां आप 15 फरवरी के बाद लगा सकते हैं जैसे- बैंगन, भिंडी, खीरा, ककड़ी, टमाटर, करेला और सभी बेल वाली सब्ज़ियां- तोरी, खीरा, लौकी, पेठा आदि। सर्दियों वाली फसलें आप सितंबर के अंत से लगा सकते हैं जैसे , शिमला मिर्च, धनिया, पालक, मूली, गाजर, फूलगोभी, पत्ता गोभी और ब्रॉक्ली आदि।

  • पेड़-पौधों की देख-भाल कैसे करें? कितनी धूप उनके लिए जरूरी है?

पौधों की देख-भाल के लिए जैविक उर्वरकों का उपयोग करें।आप ध्यान रखें कि आप पेड़ों के पत्ते लगातार देखते रहें। पत्तों में कोई बदलाव जैसे कोई दाग-धब्बे तो नहीं हैं। बहुत बार कीड़े पत्ते के नीचे बैठकर नुकसान करना शुरू कर देते हैं। इसलिए लगातार पेड़ के पत्तों और तने को देखते रहें।यदि पौधे में कीट लग रहे हैं तो नीम के तेल का स्प्रे करें। साथ ही पौधों को 4-5 घंटे की धूप नियमित रूप से लगने दें।

  • पेड़-पौधों के पोषण के लिए घरेलू नुस्खे क्या हैं?

पौधों के पोषण के लिए वर्मी कम्पोस्ट, गाय के गोबर से निर्मित जैविक उर्वरकों का उपयोग करें। यदि आप खाद नहीं बना सकते हैं तो किचन वेस्ट को मिक्सर में पीस कर सीधे मिट्टी में मिला दें, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।इसके साथ, आप केले के छिलकों से स्प्रे बना सकते हैं। खट्टी लस्सी आप इस्तेमाल कर सकते हैं। आप मटके में एक लीटर दही, एक लीटर पानी, थोड़ा-सा काला नमक डालकर इसे मिट्टी में दबा दें। इसका मुंह किसी कपड़े से बंद कर दें।

एक हफ्ते में जब इसमें फेरमेंटशन होना शुरू हो जाये तो आप इसे निकाल कर चार से पांच गुना अधिक पानी में मिला लें। आप इस लिक्विड को अब हर रोज़ अपने पौधों में दे सकते हैं। यह आप लगातार कर सकते हैं।

पेस्ट रोकने के लिए आप नीम के पत्ते उबालकर, इस पानी को स्प्रे की तरह इस्तेमाल करें। नीम के साथ आक-धतूरे के पत्ते भी आप पानी में उबाल सकते हैं। इसे आप डिब्बे में बहकर छह महीने तक रख सकते हैं। अदरक-लहसुन-हल्दी का पेस्ट बनाकर भी रखें और हल्का-हल्का स्प्रे कर लीजिये।

  • हमारे पाठकों के लिए कुछ जरूरी सुझाव

जैविक खेती जरूर करें। आजकल हम रसायन युक्त खाद्य पदार्थों का काफी इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे हमारे स्वास्थ्य को काफी नुकसान होता है। इसलिए जितना संभव हो सके घर में खेती करें। जैसे – टमाटर, मिर्च, लहसुन आदि जैसी रोजमर्रा की चीजें। गार्डनिंग करना बिलकुल भी मुश्किल नहीं है। आपको बस उचित समय देना है और सही मेहनत करनी है। हर हफ्ते आप अपने पेड़-पौधों को माइक्रोनुट्रिएंट दें और साथ ही, जैविक खाद और उर्वरक भी। इससे सब्ज़ियों का अच्छा विकास होगा और ये पोषण से भरपूर होंगी।

                     

जो लोग पहली बार गार्डनिंग कर रहे होते हैं, उनके लिए शुरुआत में धैर्य रखना बहुत मुश्किल होता है। बहुत बार होता है कि वे बीच में ही गार्डनिंग छोड़ देते हैं, लेकिन अपने घर में उगी सब्ज़ियाँ और फल खाने का आनंद कुछ और ही है।

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