घर के छत पर सब्जियां उगाने के लाभ और TIPS

घर के छत पर सब्जियां उगाने के लाभ और TIPS

साग-सब्जियों का हमारे दैनिक भोजन में महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि ये विटामिन, खनिज लवण, कार्बोहाइड्रेट, वसा व प्रोटीन के अच्छे स्रोत होते हैं… बाज़ार में आजकल सभी तरह की सब्जियां उपलब्ध है पर यह जरुरी नहीं की वह ताजी हों…

विशेष तौर पर शाकाहारियों के लिए आज के दौर में शुध्द सब्जी मिलना बहुत ही मुश्किल हो गया है… इसलिए आप अपने घर के आंगन में, घर की छत पर या आपके पास कोई खाली जमीन है तो आप आसानी से सब्जी बगीचा (किचन गार्डन) बना सकते हैं… इससे आपको शुध्द सब्जियां भी मिलेंगी और साथ ही आप इन सब्जियों को बेच कर कुछ पैसे भी कमा सकते हैं…

सब्जी बगीचा के लाभ:-

1. घर की खाली छत और व्यर्थ पानी व कूड़ा-करकट का सदुपयोग हो जाता है…

2. मनपसंद सब्जियों की प्राप्ति होती है…

3. साल भर स्वास्थ्यवर्धक, गुणवत्तायुक्त व सस्ती सब्जी, फल एवं फूल प्राप्त होते रहते है…

4. परिवार के सदस्यो का मनोरंजन व व्यायाम का अच्छा साधन है, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है…

5. पारिवारिक व्यय मे बचत होती है…

6. सब्जी खरीदने के लिये अन्यत्र जाना नही पड़ता…

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How to Make Terrace Garden

सबसे पहले Water Proofing

Garden तैयार करने से पहले पुरी छत पर Water Proofing बेहद जरुरी है | इसके बिना यह हरियाली आपको सुकून नही पहुचा सकती क्योंकि लगातार बनी रहने वाली नमी नीचे की दीवारों पर फ़ैल सकती है और उन्हें कमजोर बना सकती है | सभी पेड़-पौधे आप गमलों और ग्रो बैग्स में लगाएं। छत पर सीधा मिट्टी न डालें बल्कि आप प्लास्टिक शीट इस्तेमाल कर सकते हैं।

Perfect मौसम का इन्तजार

छत पर Garden बनाने की तैयारी करने का यह सबसे अच्छा मौसम है | बरसाती मौसम में मिटटी फटाफट सेटल हो जाती है और पौधों को भी तेजी से बढने लायक माहौल मिलता है |

बची-कुची चीजो की खाद

आप Kitchen की बची-कुची चीजो का प्रयोग कर इस गार्डन की खाद तैयार करने की कोशिश करे | पोटिंग मिक्स के लिए आप 60% मिट्टी और 40% खाद का इस्तेमाल करें। यदि आप कोकोपीट भी मिला रहे हैं तो तीनों को बराबर हिस्से में मिलाएं। पोटिंग मिक्स को गमले या ग्रो बैग में भरकर आप बीज लगा सकते हैं। अगर आप नहीं चाहते कि गमलों का वजन ज़्यादा हो तो आप लकड़ी का बुरादा, धान की भूसी जैसी चीज़ें भी पोटिंग मिक्स बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

वजन का ध्यान

छत पर वजन बढाना किसी भी तरह की समझदारी का काम नही है | Plastic Bags का प्रयोग करे तथा सीमेंट के भारी-भारी गमले रखने से बचे | इस तरह आप काफी खर्चा भे कर लेंगे |

ये लगाये छत पर

सब्जियां
गर्मियां: करेला, भिंडी, घीया, तोरी, टिंडा, लोबिया, ककड़ी आदि। ककड़ी व बैंगन जनवरी के आखिर तक लगा दें, जबकि बाकी सब्जियां फरवरी-मार्च में लगाएं।

सर्दियां: मूली, गाजर, टमाटर, गोभी, पत्तागोभी, पालक, मेथी, लहसुन, बैंगन, मटर आदि। ये सभी सब्जियां अक्टूबर, नवंबर में लगाई जाती हैं।

यह छत के आकार पर निर्भर करता है कि आपको क्या क्या मिलेगा | कुछ लोग तो संतरा , अंगूर , नीम्बू और केला भी लगा लेते है | आप Hybrid बीज लगा सकते है ये Terrace Garden के लिए काफी फायदेमंद होते है तथा बेहद आसानी से मिल जाते है |

दिन में दो बार पानी

बरसात की बात तो जाने दे , परन्तु छत पर रखे पौधों को आमतौर पर दिन में दो बार पानी देने की जरूरत पडती है | वे सब्जिया या फल नही लगाये जाने चाहिए , जिन्हें ज्यादा पानी की जरूरत पडती है | इससे घर में पानी की खपत बढ़ेगी | पानी देने से पहले पौधों को चेक करें। हर सुबह पौधों में पानी दें और  सूरज की रोशनी के पास रख दें। पौधों की मिट्टी अगर गीली है तो पानी न दें। ज्यादा पानी से जड़ सड़ने लगती है। अगर आप नोटिस करती हैं कि पौधे सूख रहे हैं या पीले पड़ रहे है, तब आप पौधों को दिन भर के लिए घर के भीतर भी रख सकती हैं।

Garden को सेट करने से पहले यह तय क्र कि आप इतना पानी खर्च कर पायेंगे या नही |

रखे हर पौधे का ख्याल

Terrace पर मौजूद हर पौधे का ख्याल रखना आपकी जिम्मेदारी है इसलिए उसकी जरूरत और रखने की जगह तक की जानकारी आपको होने चाहिए | जगह के चुनाव से मतलब उसे मिलने वाली सूरज की रोशनी से है | कुछ पौधे ऐसे होते है जिन्हें केवल पचास फीसदी धुप की जरूरत होती है जबकि गुलाब जैसे पौधों को 75 प्रतिशत धुप की जरूरत होती है | इनके लिए जरुरी छाँव का इंतजाम भी आपको ही करना है |

खाद व कीड़े़-मकौड़ों से बचाव

हर्बल नीम तेल का इस्तेमाल कीड़े-मकौड़ों भगाने के लिए नियमित रूप से दो-तीन महीने के अंतराल पर करें।

फ्लोर तैयार करना

गार्डन तैयार करने से पहले आप अपने छत को वॉटरप्रूफ यानी जलरहित बनाने की तैयारी करें। आपके छत का फ्लोर आपके गार्डेन की बेस के तहत काम करेगा। आप अपनी छत पर पौधे उगाने के लिए सीधे मिट्टी नहीं डाल सकती हैं। सबसे पहले आपको पक्की ईंट या  जिस ईंट को मिट्टी पकाकर में पक्का किया जाता है, इसे छत पर पूरी बिछा दें। यह आम ईंटों से बेहतर होता है क्योंकि कच्ची ईंट पिघलकर निकासी में बाधा उत्पन्न करती है। उसके बाद इस पर वायर मेस बिछा दें। यह आपके मिट्टी को ईंटों के अंदर जाने से बचाता है। इससे छत भी खराब नहीं होगी और छत पर हरियाली बढ़ेगी।

ड्रेनेज सिस्टम यानी निकासी 

टूसरा महत्वपूर्ण काम है निकासी या ड्रेनेज सिस्टम का ध्यान रखना। टेरेस यानी छत पर यह सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। अगर पानी की निकासी नहीं की गई तो यह आपकी बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा सकता है।

रखें ध्यान

-गमलों में लगे पौधों में पानी के निकास की सही व्यवस्था होना जरूरी है। इनमें अगर पानी लंबे समय तक ठहरा रहता है तो पौधों की जड़ सड़ने लगती हैं। ऐसे में गमलों में भरे ज्यादा पानी को निकाल देना चाहिए।

-मानसून में लॉन में लगे पौधों की मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद खाद भी ज्यादा पानी के कारण बह जाती है, इससे पौधों को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इसके लिए खास किस्म की शीट्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पौधे के ऊपरी भाग में मौजूद मिट्टी की पौष्टिकता बनी रहती है।

-पौधों के साथ-साथ इन दिनों खरपतवार भी फलती-फूलती है। इन्हें ज्यादा बढ़ने न दें, निकाल कर बाहर करें। घास की जड़ों को नुकसान पहुंचाए बिना हाथ या पतली खुरपी की मदद से इन्हें निकालें।

-बरसात के मौसम में सदाबहार पौधों की छंटाई की जा सकती है। इससे पौधे सुंदर और व्यवस्थित रहते हैं। फूलों के पौधों की कटिंग से इन्हें नई शेप दे सकते हैं। तनों से काटकर जिनकी कलमें लगाई जा सकती हैं, उन्हें नए पौधे के रूप में रोपा जा सकता है। झाड़ियों वाले पौधों की भी कटाई-छंटाई इस मौसम में करनी चाहिए, इन्हें सर्कुलर, ओवल या स्क्वेयर जिस शेप में चाहें कटिंग कर सकते हैं।

-मानसून के दिनों में पौधों को कम से कम पानी देना चाहिए। पानी तभी दें अगर मिट्टी सूखी दिखे या उनकी पत्तियों गिरने लगें। पानी देना भी हो तो बहुत कम मात्रा में दें।

-मानसून में रसायनयुक्त खाद की बजाय प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करें। गाय के गोबर से बनी खाद में पर्याप्त पोषक तत्व होते हैं, इनका छिड़काव पौधों और मिट्टी में करें। इन दिनों पत्तियों के छिद्र खुल जाते हैं और अगर इन पर खाद का छिड़काव किया जाए तो इससे उन्हें खाद में मौजूद पौष्टिक तत्व जल्दी मिलते हैं।

कई फायदे

छत पर बगीचा होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि घर के अंदर खासी ठंडक बनी रहती है | जब इसमें सब्जियाँ उगने लगेगी तो आसानी के साथ हफ्ते में चार दिन का कोटा यहाँ से पूरा किया जा सकता है | पक्षियों का आना-जाना बढ़ेगा और तितिलिया मंडराने लगेगी , कुल मिलाकर जीवंत माहौल पैदा होगा |

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